आज भी इस बलिदानी जवान की दिवंगत आत्मा बॉर्डर पर देती है पहरा, भारतीय सेना करती है इनकी पूजा…

आपके अपने वेब पोर्टल ड्रेस प्लेनेट में हार्दिक सवागत है, मित्रों हमारे देश की सेना में सैनिको की कोई कमी नहीं है,जैसा की आपको पता ही होगा की हमारे देश में एक से भड़कर एक बटैलियन है जिसमे हर हर राज्य प्रान्त के सैनिक है और उनकी अपनी ही अलग अलग विशेषताएँ है और इतना ही नहीं हमारे देश में कुल 56 बटैलियन है और कुल 5 लाख सैनिक है और इनमे से 2.5 लाख सैनिक हमेशा किसी न किसी बॉर्डर पर तैनात है और देश की सेवा में लगे हुए अपने प्राणो को देश की सेवा में लगा रखा है.

मित्रो आज हम आपको एक ऐसे सैनिक की सत्य कहानी सुनाने जा रहे है जिसे जानकर आपको गर्व की अनुभूति होना तय है इस सैनिक का नाम जानने से पहले आपको इनके कारनामो के बारे में बताते है यह आज से लग भग 40 साल पहले मर चुके है और इनकी आत्मा आज भी भारतीय सीमाओं की सुरक्षा करती है, माना जाता है यह सैनिक की आत्मा करती है, और ये कोई और नहीं बल्कि खुद भारतीय सेना का मन्ना है, मित्रो उस इस सैनिक का नाम बाबा हरभजन सिंह है और कहाँ जाता है कि न की इस भारतीय जवान को इनकी तनख्वा आज भी दी जाती है बल्कि इनका प्रमोशन भी समय के अनुसार किया जाता है !

मित्रो यह कहानी कोई काल्पनिक नहीं बल्कि शत प्रतिष सत्य है, और ये आपको एक बार को गहरी सोच में दाल देगी, इस सैनिक का सिक्किम में स्थित गंगटोक के पास एक भव्य मंदिर भी बनाया गया है जो की भारतीय सेना ने खुद बनाया है, और इस वीर बलिदानी सैनिक का नाम हरभजन सिंह है, कहाँ जाता है इस सैनिक की आत्मा आज भी भारतीय सरहदों पर देश की रक्षा करती है, और इतना ही नहीं मित्रो आज भी जब कोई सैनिक रात को सरहद पर पहरा देते हुए पालक झपकाता है तो उसे जोर का थप्पड़ महसूस होता है, आपको जानकार बड़ी हैरानी होगी की हरभजन के बंकर जिसे मंदिर भी कहा जाता है वह भारी मात्रा में सेना के अलावा सैलानी और दर्शनार्थी भी पहुंचते है, और बाबा हरभजन से अपनी सलामती के लिए उनकी पूजा-अर्चना करते है, मित्रो कहाँ जाता है बाबा हरभजन सिंह 1968 में 24 पंजाब रेजीमेंट में सैनिक थे.

मन जाता है की बलिदानी हरभजन सिंह एक दिन ड्यूटी करते हुए वह घुस्खलन में दब गए थे, और उस हादसे के बाद उनका पार्थिव शरीर सेना को नहीं मिला, तो सेना ने इस बात की जानकारी नहीं थी की हरभजन सिंह घूसखलन में दब गए तो सेना ने उनको भगोड़ा घोषित कर दिया इसके बाद कहा जाता है की हरभजन सिंह अपनी मृत्यु का आभास दिलाने के लिए एक दिन वे अपनी ही बटैलियन के एक सैनिक मित्र के सपने में आए और अपनी मृत्यु व् शरीर के बारे में अपने मित्र
को बताया तभी उनके मित्र ने इस सपने की जानकारी अपने उच्च स्तरीय अधिकारी को बताय और फिर सैनिक हरभजन सिंह की खोजबीन शुरू हो गई.

उस सैनिक ने जहाँ ठिकाना बताया वही पर उनका पार्थिव शरीर ठीक उसी जगह मिला, तभी सेना ने उनके इस महान शक्ति को देखते हुए झा उनका पार्थिव शरीर
मिला ठीक वही पर उनका एक भव्य मंदिर बना दिया गया और वही पर उनकी पूजा होने लगी, वहाँ के लोगो का मानना है आज भी हरभजन की आत्मा यहाँ के सैनिको की और सरहद की रक्षा करती है.

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